महाकाली साधना विधि || Mahakali Sadhana Vidhi || Kali Sadhana Mantra

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महाकाली साधना विधि || Mahakali Sadhana Vidhi

आज हम आपको Mahakali Sadhana Vidhi के बारे में बताने जा रहे हैं ! यह तो आप सब जानते है की दस महाविद्याओं में प्रमुख महाकाली साधना मानी जाती हैं ! इस साधना को करने से के बाद साधक के जीवन में बहुत ही समस्याओं का स्वयं ही निवारण हो जाता हैं !! Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi द्वारा बताये जा रहे महाकाली साधना विधि || Mahakali Sadhana Vidhi को जानकर आप भी महाविद्या महाकाली साधना पूरी कर सकते हैं !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 9667189678 Mahakali Sadhana Vidhi By Acharya Pandit Lalit Trivedi 

महाकाली साधना विधि || Mahakali Sadhana Vidhi

महाकाली साधना कब करें || Mahakali Sadhana Kab Kare : 

महाविद्या महाकाली साधना आप नवरात्रि के दिनों में कर सकते हैं ! महाविद्या महाकाली साधना रात में 9 बजे या उसके बाद की जाने वाली साधना हैं ! 

महाकाली साधना पूजा विधि || Mahakali Sadhana Puja Vidhi :

महाविद्या महाकाली साधना करने वाले साधक को स्नान करके शुद्ध काले वस्त्र धारण करके किसी काली मंदिर या अपने घर में किसी एकान्त स्थान या पूजा कक्ष में दक्षिण दिशा की तरफ़ मुख करके काले आसन पर बैठ जाए ! उसके बाद अपने सामने चौकी रखकर उस पर काला रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर प्लेट स्थापित कर उस प्लेट में रोली या काजल से त्रिकोण बनाये उस पर मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठा युक्त "महाकाली यंत्र" को स्थापित करें ! महाकाली यंत्र के सामने शुद्ध सरसों के तेल का दीपक जलाये और मन्त्र विधान अनुसार संकल्प आदि कर सीधे हाथ में जल लेकर विनियोग करे :

ॐ अस्य श्री दक्षिण कालिका मन्त्रस्य भैरव ऋषि रुष्णि दक्षिण कालिका देवता ह्रीं बीजं हूं शक्ति: क्रीं कीलकं ममा भीष्टसिद्धयर्थे जपे विनियोग:।

ऋष्यादि न्यास : बाएँ हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ की समूहबद्ध, पांचों उंगलियों से नीचे दिए गये निम्न मंत्रो का उच्चारण करते हुए अपने भिन्न भिन्न अंगों को स्पर्श करते हुए ऐसी भावना मन में रखें कि वे सभी अंग तेजस्वी और पवित्र होते जा रहे हैं ! ऐसा करने से आपके अंग शक्तिशाली बनेंगे और आपमें चेतना प्राप्त होती है ! मंत्र :

भैरवऋषये नम: शिरसि ( सर को स्पर्श करें )
उष्णिक् छन्दसे नम: मुखे ( मुख को स्पर्श करें )
दक्षिणकालिकादेवतायै नम: ह्रदये ( ह्रदय को स्पर्श करें )
ह्रीं बीजाय नमो गुहे ( गुप्तांग को स्पर्श करें )
हूं शक्तये नम: पादयोः ( पैरों को स्पर्श करें )
क्रीं कीलकाय नम: नाभौ ( नाभि को स्पर्श करें )
विनियोगाय नम: सर्वांगे ( पूरे शरीर को स्पर्श करें )

कर न्यास : अपने दोनों हाथों के अंगूठे से अपने हाथ की विभिन्न उंगलियों को स्पर्श करें, ऐसा करने से उंगलियों में चेतना प्राप्त होती है ।

ॐ क्रां अंगुष्ठाभ्यां नम: ।
ॐ क्रीं तर्जनीभ्यां नम: ।
ॐ क्रूं मध्यमाभ्यां नम: ।
ॐ क्रैं अनामिकाभ्यां नम: ।
ॐ क्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नम: ।
ॐ क्र: करतलकरपृष्ठाभ्यां नम: ।

ह्रदयादि न्यास : पुन: बाएँ हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ की समूहबद्ध, पांचों उंगलियों से नीचे दिए गये निम्न मंत्रों के साथ शरीर के विभिन्न अंगों को स्पर्श करते हुए ऐसी भावना मन में रखें कि वे सभी अंग तेजस्वी और पवित्र होते जा रहे हैं ! ऐसा करने से आपके अंग शक्तिशाली बनेंगे और आपमें चेतना प्राप्त होती है ! मंत्र :

ॐ क्रां ह्रदयाय नम: ( ह्रदय को स्पर्श करें )
ॐ क्रीं शिरसे स्वाहा ( सिर को स्पर्श करें )
ॐ क्रूँ शिखायै वषट् ( शिखा को स्पर्श करें )
ॐ क्रैं कवचाय हुम् ( दोनों कंधों को स्पर्श करें )
ॐ क्रौं नेत्रत्रयाय वौषट ( दोनों नेत्रों को स्पर्श करें )
ॐ क्र: अस्त्राय फट् ( सिर के ऊपर से ऊँगली घुमाकर चारों दिशाओं में चुटकी बजाएं )

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ध्यान : इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर माँ भगवती महाकाली का ध्यान करके पूजन करें ! और धुप, दीप, चावल, पुष्प से महाविद्या महाकाली मन्त्र का जाप करें !

शवारुढ़ाम्महा भीमां घोरदंष्ट्रां हसन्मुखीम् ।
चतुर्भुजां खड्ग मुण्डवरा भयकरां शिवाम् ।।
मुण्ड मालाधरान्देवी लोलजिह्वान्दिगम्बरां ।
एवं संचिन्तयेत्काली शमशानालयवासिनीम्।।

ऊपर दिया गया पूजन सम्पन्न करके सिद्ध प्राण प्रतिष्ठित “रुद्राक्ष माला” की माला से नीचे दिए गये मंत्र की 23 माला 11 दिनों तक जप करें ! और मंत्र उच्चारण करने के बाद काली कवच का पाठ करें !

महाकाली साधना सिद्धि मन्त्र || Mahakali Sadhana Siddhi Mantra

।। क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा ।।

मंत्र उच्चारण करने के काली कवच पढ़ें. दी गई यह Mahakali Sadhana ग्यारह दिनों की साधना है ! Mahakali Sadhana करते समय साधक पूर्ण आस्था के साथ नियमों का पालन जरुर करें !  और नित्य जाप करने से पहले ऊपर दी गई संक्षिप्त पूजन विधि जरुर करें ! साधक Mahakali Sadhana करने की जानकारी गुप्त रखें ! ग्यारह दिनों के बाद मन्त्रों का जाप करने के बाद दिए गये मन्त्र जिसका आपने जाप किया हैं उस मन्त्र का दशांश ( 10% भाग ) हवन अवश्य करें ! हवन में छोटी काली मिर्च, पांच मेवा, शुद्ध घी व् हवन सामग्री को मिलाकर आहुति दें ! हवन के बाद महाकाली यंत्र को अपने घर से दक्षिण दिशा की तरफ पड़ने वाले शिव मंदिर में दान कर दें और बाकि बची हुई पूजा सामग्री को नदी या किसी पीपल के नीचे विसर्जन कर आयें ! ऐसा करने से साधक की Mahakali Sadhana पूर्ण हो जाती हैं ! और साधक के ऊपर माँ महाकाली देवी की कृपा सदैव बनी रही हैं ! महाविद्या Mahakali Sadhana Vidhi कलियुग में कल्प वृक्ष के समान शीघ्र फल देने वाली बताई गई हैं !


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