Sunday, May 12, 2019

माँ कमला स्तोत्र || Maa Kamala Stotra || Shri Kamala Stotram

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माँ कमला स्तोत्र || Maa Kamala Stotra

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माँ कमला स्तोत्र || Maa Kamala Stotra

ओंकाररूपिणी देवि विशुद्धसत्त्वरूपिणी ।
देवानां जननी त्वं हि प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

तन्मात्रंचैव भूतानि तव वक्षस्थलं स्मृतम् ।
त्वमेव वेदगम्या तु प्रसन्ना भव सुंदरि ॥

देवदानवगन्धर्वयक्षराक्षसकिन्नरः ।
स्तूयसे त्वं सदा लक्ष्मि प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

लोकातीता द्वैतातीता समस्तभूतवेष्टिता ।
विद्वज्जनकीर्त्तिता च प्रसन्ना भव सुंदरि ॥

परिपूर्णा सदा लक्ष्मि त्रात्री तु शरणार्थिषु ।
विश्वाद्या विश्वकत्रीं च प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

ब्रह्मरूपा च सावित्री त्वद्दीप्त्या भासते जगत् ।
विश्वरूपा वरेण्या च प्रसन्ना भव सुंदरि ॥

क्षित्यप्तेजोमरूद्धयोमपंचभूतस्वरूपिणी ।
बन्धादेः कारणं त्वं हि प्रसन्ना भव सुंदरि ॥

महेशे त्वं हेमवती कमला केशवेऽपि च ।
ब्रह्मणः प्रेयसी त्वं हि प्रसन्ना भव सुंदरि ॥

चंडी दुर्गा कालिका च कौशिकी सिद्धिरूपिणी ।
योगिनी योगगम्या च प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

बाल्ये च बालिका त्वं हि यौवने युवतीति च ।
स्थविरे वृद्धरूपा च प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

गुणमयी गुणातीता आद्या विद्या सनातनी ।
महत्तत्त्वादिसंयुक्ता प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

तपस्विनी तपः सिद्धि स्वर्गसिद्धिस्तदर्थिषु ।
चिन्मयी प्रकृतिस्त्वं तु प्रसन्ना भव सुंदरि ॥

त्वमादिर्जगतां देवि त्वमेव स्थितिकारणम् ।
त्वमन्ते निधनस्थानं स्वेच्छाचारा त्वमेवहि ॥

चराचराणां भूतानां बहिरन्तस्त्वमेव हि ।
व्याप्यव्याकरूपेण त्वं भासि भक्तवत्सले ॥

त्वन्मायया हृतज्ञाना नष्टात्मानो विचेतसः ।
गतागतं प्रपद्यन्ते पापपुण्यवशात्सदा ॥

तावन्सत्यं जगद्भाति शुक्तिकारजतं यथा ।
यावन्न ज्ञायते ज्ञानं चेतसा नान्वगामिनी ॥

त्वज्ज्ञानात्तु सदा युक्तः पुत्रदारगृहादिषु ।
रमन्ते विषयान्सर्वानन्ते दुखप्रदान् ध्रुवम् ॥

त्वदाज्ञया तु देवेशि गगने सूर्यमण्डलम् ।
चन्द्रश्च भ्रमते नित्यं प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

ब्रह्मेशविष्णुजननी ब्रह्माख्या ब्रह्मसंश्रया ।
व्यक्ताव्यक्त च देवेशि प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

अचला सर्वगा त्वं हि मायातीता महेश्वरि ।
शिवात्मा शाश्वता नित्या प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

सर्वकायनियन्त्री च सर्वभूतेश्वरी ।
अनन्ता निष्काला त्वं हि प्रसन्ना भवसुन्दरि ॥

सर्वेश्वरी सर्ववद्या अचिन्त्या परमात्मिका ।
भुक्तिमुक्तिप्रदा त्वं हि प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

ब्रह्माणी ब्रह्मलोके त्वं वैकुण्ठे सर्वमंगला ।
इंद्राणी अमरावत्यामम्बिका वरूणालये ॥

यमालये कालरूपा कुबेरभवने शुभा ।
महानन्दाग्निकोणे च प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

नैऋर्त्यां रक्तदन्ता त्वं वायव्यां मृगवाहिनी ।
पाताले वैष्णवीरूपा प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

सुरसा त्वं मणिद्वीपे ऐशान्यां शूलधारिणी ।
भद्रकाली च लंकायां प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

रामेश्वरी सेतुबन्धे सिंहले देवमोहिनी ।
विमला त्वं च श्रीक्षेत्रे प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

कालिका त्वं कालिघाटे कामाख्या नीलपर्वत ।
विरजा ओड्रदेशे त्वं प्रसन्ना भव सुंदरि ॥

वाराणस्यामन्नपूर्णा अयोध्यायां महेश्वरी ।
गयासुरी गयाधाम्नि प्रसन्ना भव सुंदरि ॥

भद्रकाली कुरूक्षेत्रे त्वंच कात्यायनी व्रजे ।
माहामाया द्वारकायां प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

क्षुधा त्वं सर्वजीवानां वेला च सागरस्य हि ।
महेश्वरी मथुरायां च प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

रामस्य जानकी त्वं च शिवस्य मनमोहिनी ।
दक्षस्य दुहिता चैव प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

विष्णुभक्तिप्रदां त्वं च कंसासुरविनाशिनी ।
रावणनाशिनां चैव प्रसन्ना भव सुन्दरि ॥

लक्ष्मीस्तोत्रमिदं पुण्यं यः पठेद्भक्सिंयुतः ।
सर्वज्वरभयं नश्येत्सर्वव्याधिनिवारणम् ॥

इदं स्तोत्रं महापुण्यमापदुद्धारकारणम् ।
त्रिसंध्यमेकसन्ध्यं वा यः पठेत्सततं नरः ॥

मुच्यते सर्वपापेभ्यो तथा तु सर्वसंकटात् ।
मुच्यते नात्र सन्देहो भुवि स्वर्गे रसातले ॥

समस्तं च तथा चैकं यः पठेद्भक्तित्परः ।
स सर्वदुष्करं तीर्त्वा लभते परमां गतिम् ॥

सुखदं मोक्षदं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिसंयुक्तः ।
स तु कोटीतीर्थफलं प्राप्नोति नात्र संशयः ॥

एका देवी तु कमला यस्मिंस्तुष्टा भवेत्सदा ।
तस्याऽसाध्यं तु देवेशि नास्तिकिंचिज्जगत् त्रये ॥

पठनादपि स्तोत्रस्य किं न सिद्धयति भूतले ।
तस्मात्स्तोत्रवरं प्रोक्तं सत्यं हि पार्वति ॥

॥ इति श्रीकमला स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥


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