Sunday, May 12, 2019

माँ धूमावती देवी मंत्र || Maa Dhumavati Devi Mantra || Dhumavati Mantra

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माँ धूमावती देवी मंत्र || Maa Dhumavati Devi Mantra

आज हम आपको Maa Dhumavati Devi Mantra के बारे में बताने जा रहे हैं ! यह तो आप सब जानते है की दस महाविद्याओं में सातवें स्थान पर धूमावती साधना मानी जाती हैं ! महाविद्या धूमावती साधना विधि के बारे में हम पहले ही जानकारी दे चुके हैं !इस साधना को आप चैत्र व् आश्विन नवरात्रि में या गुप्त नवरात्रि में कर सकते है ! दस महाविद्याओं में सातवें स्थान में अवस्थित, कुरूप तथा अपवित्र देवी धूमावती धुएं के रूप में विद्यमान, धनहीन, अशुभता, दुर्भाग्य से सम्बंधित, विधवा देवी धूमावती । देवी धूमावती को आज-तक कोई योद्धा युद्ध में परास्त नहीं कर पाया, तभी देवी का कोई संगी-साथी नहीं हैं । देवी धूमावती की उपस्थिति, सूर्य अस्त के प्रदोष काल से रात्रि पर्यंत रहती है तथा देवी अंधकारमय स्थानों पर आश्रय लेती हैं या निवास करती हैं, अन्धकार इन्हें प्रिय हैं !! Online Specialist Astrologer Acharya Pandit Lalit Trivedi द्वारा बताये जा रहे माँ धूमावती देवी मंत्र || Maa Dhumavati Devi Mantra को जानकर आप भी महाविद्या धूमावती साधना पूरी कर सकते हैं !! जय श्री सीताराम !! जय श्री हनुमान !! जय श्री दुर्गा माँ !! जय श्री मेरे पूज्यनीय माता – पिता जी !! यदि आप अपनी कुंडली दिखा कर परामर्श लेना चाहते हो तो या किसी समस्या से निजात पाना चाहते हो तो कॉल करके या नीचे दिए लाइव चैट ( Live Chat ) से चैट करे साथ ही साथ यदि आप जन्मकुंडली, वर्षफल, या लाल किताब कुंडली भी बनवाने हेतु भी सम्पर्क करें Mobile & Whats app Number : 9667189678 Maa Dhumavati Devi Mantra By Acharya Pandit Lalit Trivedi

माँ धूमावती देवी मंत्र || Maa Dhumavati Devi Mantra

मुख्य नाम : धूमावती।
अन्य नाम : चंचला, गलिताम्बरा, विरल-दंता, मुक्त केशी, शूर्प-हस्ता, काक ध्वजिनी, रक्षा नेत्रा, कलह प्रिया।
भैरव : विधवा, कोई भैरव नहीं।
भगवान विष्णु के २४ अवतारों से सम्बद्ध : भगवान मत्स्य अवतार।
कुल : श्री कुल।
दिशा : आग्नेय कोण।
स्वभाव : सौम्य-उग्र।
कार्य : अपवित्र स्थानों में निवास कर, रोग, समस्त प्रकार से सुख को हरने, दरिद्रता, शत्रुों का विनाश करने वाली।
शारीरिक वर्ण : काला।

माँ धूमावती देवी सप्ताक्षरी मंत्र : Saptakshari Dhumavati Devi Mantra

धूं धूमावती स्वाहा॥

माँ धूमावती देवी अष्टाक्षरी मंत्र : Ashtakshari Dhumavati Devi Mantra

धूं धूं धूमावती स्वाहा॥

माँ धूमावती देवी दशाक्षरी मंत्र : Dasakshari Dhumavati Devi Mantra

धूं धूं धूं धूमावती स्वाहा॥

माँ धूमावती देवी चतुर्दशाक्षरी मंत्र : 

धूं धूं धुर धुर धूमावती क्रों फट् स्वाहा॥

माँ धूमावती देवी पंचादश मंत्र : Panchadasi Dhumavati Devi Mantra

ॐ धूं धूमावती देवदत्त धावति स्वाहा॥ 

ॐ धूमावत्यै विद्महे संहारिण्यै धीमहि तन्नो धूमा प्रचोदयात्॥

मां धूमावती महाशक्ति स्वयं नियंत्रिका हैं। ऋग्वेद में रात्रिसूक्त में इन्हें ‘सुतरा’ कहा गया है। अर्थात ये सुखपूर्वक तारने योग्य हैं। इन्हें अभाव और संकट को दूर करने वाली मां कहा गया है। तंत्र मंत्र जादू टोना बुरी नजर और भूत प्रेत आदि समस्त भयों से मुक्ति के लिए धूमावती देवी की साधना करें।। धूमावती श्री विहीनता अपने सूप में लेकर चली जाती है. जीवन से दुर्भाग्य, अज्ञान, दुःख, रोग, कलह, शत्रु विदा होते ही साधक ज्ञान, श्री और रहस्यदर्शी हो जाता है और साधना में उच्चतम शिखर पे पहुच जाता है ! क्रोधमय ऋषियों की मूल शक्ति धूमावती हैं जैसे दुर्वासा, अंगीरा, भृगु, परशुराम आदि ।। देवी मंत्र शक्ति से हवन किया जाय, नीम की पत्तियों सहित घी का होम करने से लम्बे समस से चला आ रहा ऋण नष्ट होता है ।। मीठी रोटी व घी से होम करने पर बड़े से बड़ा संकट व बड़े से बड़ा रोग अति शीग्र नष्ट होता है ।।

नोट : महाविद्या Maa Dhumavati Devi Mantra आप बिना गुरु बनाये ना करें गुरु बनाकर व् अपने गुरु से सलाह लेकर इस साधना को करना चाहिए ! क्युकी बिना गुरु के की हुई साधना आपके जीवन में हानि ला सकती है ! 


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